महिलाओं ने बदली गांव की तस्वीर, केवरी में पूर्ण शराबबंदी

महिलाओं ने बदली गांव की तस्वीर, केवरी में पूर्ण शराबबंदी

अंबिकापुर : उत्पाद शुल्क अधिनियम के तहत छत्तीसगढ़ के अनुसूचित क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति परिवारों को घरेलू उपयोग और सामाजिक-धार्मिक उत्सवों के लिए अधिकतम पांच लीटर देशी महुआ शराब निर्माण और अपने पास रखने की छूट है, लेकिन सरगुजा जिले के लखनपुर जनपद के ग्राम पंचायत केवरी ने यह अधिकार छोड़ दिया है।

शराब सेवन से सामाजिक और आर्थिक पतन के साथ मारपीट से तंग गांव की महिलाओं की पहल से ग्राम पंचायत ने एक सितंबर से पूर्ण शराबबंदी लागू कर दिया है। इसके तहत शराब निर्माण,बिक्री के साथ शराब सेवन पर अर्थदंड का प्रविधान लागू किया गया है।

16 लोगों पर लगाया गया अर्थदंड

ग्रामसभा से पारित प्रस्ताव के परिपालन में एक सितंबर से अभी तक 16 लोगों पर शराब सेवन करने पर 45 हजार रुपये अर्थदंड अधिरोपित किया गया है। इनमें से 14 लोग दूसरे गांव से शराब सेवन कर आए थे,इन पर तीन-तीन हजार का अर्थदंड अधिरोपित किया गया। दो लोग शराब सेवन कर गांव में घूमते पाए गए ,इन पर 1500-1500 रुपये जुर्माना वसूल किया गया।
दरअसल गांव के सभी लोगों की उपस्थिति के बीच शराबबंदी का नियम लागू किया गया है। 20 अगस्त को पारित प्रस्ताव के बाद गांव में घर-घर जाकर नियम की जानकारी दी गई। पंपलेट वितरित किए गए। लोगों को जागरूक किया गया। उसके बाद एक सितंबर से इसका अनुपालन शुरू किया गया है।ग्राम सुधार अभियान के तहत पंचायत के हर मोहल्ले में निगरानी समिति का गठन किया गया है जो शराब निर्माण,बिक्री और पीने वालों पर नजर रखती है।

2500 की आबादी,आदिवासी बहुल गांव

ग्राम पंचायत केवरी की आबादी लगभग 2500 है। यहां मतदाताओं की संख्या लगभग 1100 है। यहां गोंड, कंवर जनजाति के अलावा मानिकपुरी, यादव, लोहार समाज के लोग निवास करते हैं। शराबबंदी से पहले कई घरों में देशी महुआ शराब का निर्माण होता था लेकिन अब यह बंद हो चुका है। ऐसे परिवार जो शराब निर्माण और बिक्री करते थे ,वे भी अब यह धंधा बंद कर चुके हैं।
ये है जुर्माने का प्रविधान

पंचायत ने शराब निर्माण और बिक्री पर पांच-पांच हजार, सेवन करने वालों पर 1500 रुपये तथा शराब के नशे में लड़ाई-झगड़ा तथा दूसरे गांव से शराब सेवन कर आने वालों से तीन-तीन हजार अर्थदंड वसूल किए जाने का नियम लागू हो चुका है। शराब के कारण आए दिन गांव में लड़ाई-झगड़ा होता था।
कई परिवारों की आर्थिक स्थिति खराब होती जा रही थी। सामाजिक स्तर पर भी बदनामी झेलनी पड़ रही थी। अशिक्षा से आर्थिक उन्नयन में बाधा तथा महिलाओं को मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा था।इस कारण पूर्णतः शराबबंदी का निर्णय लिया गया।

वर्जन 1

शराबबंदी का निर्णय सामूहिक रूप से लिया गया। ग्रामसभा में सभी की सहमति से अर्थदंड का प्रविधान लागू किया गया है। अर्थदंड की राशि का उपयोग गांव के विकास में किया जाएगा। ग्रामीणों की सहमति से ही हर काम होगा। हर मोहल्ले में निगरानी समिति बनी है जो शराबबंदी के निर्णय का पालन कराने के लिए हर गतिविधि पर नजर रखती है। मनिजर राम, सरपंच, ग्राम पंचायत केवरा

छत्तीसगढ़