कोरबा: वर्षा जल के अधिकतम संरक्षण और जंगलों में प्राकृतिक नमी बनाए रखने के उद्देश्य से कटघोरा वनमंडल में बड़े पैमाने पर कंटूर ट्रेंच का निर्माण किया गया है। इस वर्ष मानसून की अच्छी वर्षा से इन ट्रेंचों में पानी भर गया है, जिससे जंगलों में लंबे समय तक नमी बनी रहेगी। इसका सीधा लाभ पौधों की वृद्धि, भूजल स्तर में सुधार, मृदा संरक्षण और वन्यजीवों को मिलेगा।
वन विभाग का मानना है कि यह पहल आने वाले वर्षों में जंगलों की हरियाली को और समृद्ध बनाने के साथ-साथ जल संरक्षण का प्रभावी मॉडल भी साबित होगी।कटघोरा वनमंडल के सातों वन परिक्षेत्रों में कुल 34,469 कंटूर ट्रेंच तैयार किए गए हैं। इनका उद्देश्य वर्षा के दौरान बहकर व्यर्थ चले जाने वाले पानी को रोककर उसे जमीन के भीतर पहुंचाना है। प्रत्येक ट्रेंच लगभग तीन मीटर लंबा, 45 सेंटीमीटर चौड़ा और 45 सेंटीमीटर गहरा बनाया गया है।
बारिश का पानी इनमें एकत्र होकर धीरे-धीरे जमीन में रिसता है, जिससे भूजल का पुनर्भरण होता है और आसपास की मिट्टी लंबे समय तक नम बनी रहती है। वन विभाग के अनुसार, प्रत्येक कंटूर ट्रेंच के निर्माण पर लगभग 274 रुपये की लागत आई है। इन्हें विभाग की वार्षिक कार्ययोजना के अंतर्गत तैयार किया गया है। कम लागत में तैयार होने वाली यह तकनीक जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अत्यंत प्रभावी मानी जा रही है।
हर वर्ष वन विभाग द्वारा लाखों पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन गर्मी के मौसम में मिट्टी में नमी की कमी के कारण बड़ी संख्या में पौधे विकसित होने से पहले ही सूख जाते हैं। कंटूर ट्रेंच में संचित पानी के कारण आसपास की भूमि में पर्याप्त नमी बनी रहेगी, जिससे पौधों की जीवित रहने की संभावना बढ़ेगी। इससे पौधारोपण अभियानों की सफलता दर में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
वन अधिकारियों का कहना है कि कंटूर ट्रेंच केवल पानी रोकने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जंगलों के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने का महत्वपूर्ण उपाय भी है। लंबे समय तक मिट्टी में नमी रहने से प्राकृतिक रूप से गिरने वाले बीज भी आसानी से अंकुरित हो सकेंगे, जिससे नए पौधों का विकास होगा और वन क्षेत्र का प्राकृतिक विस्तार संभव होगा।
हाथियों के चारागाह क्षेत्र में होगा विस्तार
कटघोरा वनमंडल हाथियों की लगातार बढ़ती आवाजाही वाला क्षेत्र है। गर्मियों में जंगलों में पानी और चारे की कमी होने पर हाथियों का झुंड अक्सर भोजन और पानी की तलाश में गांवों की ओर पहुंच जाता है, जिससे मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं बढ़ने लगती हैं। वन विभाग का मानना है कि कंटूर ट्रेंच के कारण जंगलों में नमी बनी रहेगी, जिससे घास, बांस और अन्य वनस्पतियों का बेहतर विकास होगा।
विशेष रूप से हाथियों के लिए लगाए जाने वाले कंटीले बांस और अन्य चारा प्रजातियों को पर्याप्त नमी मिलेगी। साथ ही जंगलों के प्राकृतिक जलस्रोत भी लंबे समय तक पानी से भरे रहेंगे। इससे हाथियों को जंगल के भीतर ही भोजन और पानी उपलब्ध होगा तथा उनके आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने की संभावना कम होगी।
मृदा क्षरण रोकने में भी प्रभावी
पहाड़ी क्षेत्रों में तेज बारिश के दौरान पानी के साथ उपजाऊ मिट्टी भी बह जाती है, जिससे जंगलों की उत्पादकता प्रभावित होती है। कंटूर ट्रेंच वर्षा के बहाव की गति को कम करते हैं और पानी को रोककर मिट्टी के कटाव को नियंत्रित करते हैं। इससे उपजाऊ मिट्टी सुरक्षित रहती है और उसमें मौजूद प्राकृतिक बीजों को अंकुरित होने का बेहतर अवसर मिलता है। परिणामस्वरूप जंगलों का प्राकृतिक पुनर्जीवन तेज होता है और वन क्षेत्र अधिक घना एवं समृद्ध बनता है।
कैच द रेन अभियान को मिली मजबूती
वन विभाग का कहना है कि कंटूर ट्रेंच प्रधानमंत्री के कैच द रेन अभियान की अवधारणा को जमीन पर सफलतापूर्वक लागू करने का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। वर्षा जल को वहीं रोकने और जमीन में उतारने की यह तकनीक जल संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय परिणाम दे रही है। हाल ही में प्रसारित मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कोरबा जिले में जल संरक्षण के प्रयासों की सराहना की थी, जिससे जिले की पहल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
कहां कितने कंटूर ट्रेंचवन परिक्षेत्र
कंटूर ट्रेंचपाली- 7037
जटगा- 955
चैतमा- 2474
पसान- 485
एतमानगर- 3852
केंदई- 16519
कटघोरा- 3138
वर्जन
जल संरक्षण को कारगर बनान के लिए वनमंडल के सभी वनपरिक्षेत्रों में 34,469 कंटूर ट्रैंच का निर्माण किया गया है। वर्षा जल का भराव होने वन भूमि से मिट्टी का कटाव कम होगा, भूमिगत जल के समृद्ध होने से मिट्टी में लंबे समय तक नमी बनी रहेगी। जंगल में तैयार होने वाले पौधों का संरक्षण होगा।
कुमार निशांत, वनमंडलाधिकारी कटघोरा

