छत्तीसगढ़ में फ्लोटिंग सोलर का मेगा प्लान, 2000 मेगावाट बिजली तैयार

छत्तीसगढ़ में फ्लोटिंग सोलर का मेगा प्लान, 2000 मेगावाट बिजली तैयार

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 32 बड़े बांधों और जलाशयों में फ्लोटिंग सोलर प्लांट स्थापित कर करीब 2,000 मेगावाट हरित बिजली उत्पादन की योजना बनाई है। इसके लिए जल संसाधन विभाग को व्यवहार्यता अध्ययन (फिजिबिलिटी स्टडी) का प्रस्ताव भेजा गया है। अध्ययन पूरा होने के बाद उपयुक्त जलाशयों का चयन कर परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा।

मरोदा-1 परियोजना की सफलता बनी आधार

यह पहल दुर्ग जिले के मरोदा-1 जलाशय में स्थापित एनएसपीसीएल के 15 मेगावाट क्षमता वाले राज्य के पहले फ्लोटिंग सोलर प्लांट की सफलता के बाद की गई है। इस परियोजना के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए सरकार अब बड़े स्तर पर फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं का विस्तार करने की तैयारी कर रही है।

तीन नई परियोजनाओं पर भी काम

सरकार मरोदा के अलावा जांजगीर-चांपा में 6 मेगावाट, कोरबा के पोखरीडीह राखड़ बांध में 27 मेगावाट और हसदेव ताप विद्युत स्टेशन के साइलेंट सागर में 5 मेगावाट क्षमता के नए फ्लोटिंग सोलर प्लांट विकसित करेगी। इन परियोजनाओं से राज्य में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को और गति मिलने की उम्मीद है।

बैटरी स्टोरेज से मिलेगी चौबीसों घंटे बिजली

छत्तीसगढ़ पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीजीसीएल) के अधिकारियों के अनुसार, परियोजनाओं में पानी की सतह पर विशेष फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। विशेष केबलों के माध्यम से बिजली को ट्रांसमिशन नेटवर्क से ग्रिड तक पहुंचाया जाएगा। इसके साथ बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी विकसित किया जाएगा, जिससे दिन में उत्पादित अतिरिक्त बिजली को संग्रहित कर रात या अधिक मांग के समय उपयोग किया जा सकेगा।

भूमि अधिग्रहण नहीं, जल संरक्षण को भी बढ़ावा

इस योजना की खास बात यह है कि फ्लोटिंग सोलर प्लांट के लिए अलग से भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं होगी। इससे जलाशयों का बेहतर उपयोग होगा, पानी के संरक्षण में मदद मिलेगी और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता भी कम होगी।

2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा बढ़ाने का लक्ष्य

सरकार का उद्देश्य 2030 तक राज्य की कुल ऊर्जा जरूरतों में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत तक पहुंचाना है। सीएसपीजीसीएल के एमडी संजीव कटियार के अनुसार, पानी की सतह पर लगाए जाने वाले विशेष फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म और आधुनिक केबल प्रणाली के जरिए बिजली सीधे ग्रिड तक पहुंचाई जाएगी।

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