फर्जी कमिश्नर बनकर ₹84 लाख की ठगी

फर्जी कमिश्नर बनकर ₹84 लाख की ठगी

रायपुर। भारत सरकार के गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में सहायक आयुक्त बताकर लोगों को सरकारी नौकरी और ट्रांसफर दिलाने का झांसा देकर 84 लाख रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। सिविल लाइन थाना पुलिस ने दुर्ग जिले के अमलेश्वर निवासी जनार्दन यादव की शिकायत पर आरोपित रजनीश कुमार राय के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। आरोपित चार दिन पहले ही एक अन्य ठगी के मामले में गिरफ्तार होकर जेल पहुंच चुका है।

पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता जनार्दन यादव ने बताया कि वर्ष 2024 में घर खरीदने के सिलसिले में उनकी मुलाकात रजनीश कुमार राय से हुई थी। आरोपित ने खुद को भारत सरकार के गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में सहायक आयुक्त बताया। उसने फर्जी पहचान पत्र दिखाकर बड़े अधिकारियों और नेताओं से अपनी ऊंची पहुंच होने का दावा किया। इसी बहाने उसने परिवार का विश्वास जीत लिया और घर आना-जाना शुरू कर दिया।

बेटी-बेटे को नौकरी दिलाने के नाम पर लिए 12 लाख

शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपित ने उनकी बेटी आकृति यादव को एम्स में क्लर्क और बेटे अर्पित यादव को आईबी में एएसआई की नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। दोनों की नौकरी के नाम पर छह-छह लाख रुपये, कुल 12 लाख रुपये लिए। अक्टूबर 2024 में रायपुर के सर्किट हाउस स्थित कॉफी हाउस में मुलाकात के दौरान उसने चार लाख रुपये नकद लिए और बाद में शेष राशि अलग-अलग किस्तों में नकद और ऑनलाइन माध्यम से वसूल ली।

एटीएम कार्ड लेकर खातों का किया दुरुपयोग

एफआईआर के अनुसार आरोपित ने परिवार का भरोसा जीतने के बाद शिकायतकर्ता की बेटियों स्वाति यादव और आकृति यादव के एटीएम कार्ड भी अपने पास रख लिए और उनका दुरुपयोग किया। वह लगातार नौकरी लगने का भरोसा देकर परिवार को टालता रहा।

अन्य लोगों से भी लाखों रुपये की ठगी

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रजनीश कुमार राय ने कई अन्य लोगों को भी सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर रकम वसूली। इनमें रघुनाथ यादव से 15 लाख रुपये, शैलेश यादव से 15 लाख रुपये, छाया शर्मा से आठ लाख रुपये, महेंद्र पाल कौशिक से 12 लाख रुपये, नेशपाल कौशिक से 12 लाख रुपये और दिव्यांशु गुप्ता से 10 लाख रुपये लिए। इसके अलावा आकृति यादव और अर्पित यादव से छह-छह लाख रुपये लिए गए। इस तरह कुल 84 लाख रुपये की ठगी करने का आरोप है। आरोपित ने एम्स, आईबी, नारकोटिक्स विभाग, पुलिस उपनिरीक्षक, आरक्षक और क्लर्क जैसे पदों पर नौकरी दिलाने का झांसा दिया।

समाचार पढ़ने के बाद खुला मामला

जनार्दन यादव ने पुलिस को बताया कि एक वर्ष बीतने के बाद भी किसी की नौकरी नहीं लगी। हाल ही में फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर ठगी करने की खबर पढ़ने के बाद उन्हें शक हुआ और उन्होंने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने आरोपित के खिलाफ धोखाधड़ी, प्रतिरूपण, फर्जी पहचान का उपयोग और छलपूर्वक रकम हड़पने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस बैंक खातों, फर्जी पहचान पत्र, लेन-देन और अन्य संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटाकर मामले की जांच कर रही है।

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