रायगढ़: रायगढ़ में आयोजित 10 दिवसीय 39 वें चक्रधर समारोह के चौथी संगीत संध्या में मुम्बई, दिल्ली एवं रायपुर से आए कलाकारों के द्वारा प्रस्तुत कव्वाली, बांसुरी वादन, अकार्डियन वादन, तबला वादन एवं गजल गायन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुम्बई के प्रसिद्ध ग्रैमी अवार्ड विजेता बांसुरी वादक राकेश चौरसिया की मधुर मुरली से निकले अद्भुत अलौकिक सुर से समारोह में घुली रूहानी मिठास घोल दी।
इसी तरह रायपुर के तपसीर मोहम्मद एंड टीम द्वारा अकार्डियन की सुरीली धुनों में प्रस्तुति दी। जिसमे 8 साल से 77 साल उम्र के कलाकारों ने एक साथ मंच में प्रस्तुति दी और समारोह में पहुंचे विदेशी कलाकारों ने रोचक मंच संचालन किया। दिल्ली से आए चांद अफजल कादरी की कव्वाली पर देर रात तक झूमते रहे श्रोता। कार्यक्रम में गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में शामिल भजन एवं गजल गायक प्रभंजय चतुर्वेदी की गायकी से महक उठा पूरा चक्रधर समारोह।
कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति में रायगढ़ की अनिता शर्मा ने भगवान गणेश वंदन घर में पधारो गजानन जी सामूहिक भक्ति गीत गायन व जयकारे के साथ भक्तिमय माहौल में कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। उनके सुमधुर प्रस्तुति नगरी हो अयोध्या की… रघुकुल का घराना हो गीत से दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। मौके पर उन्होंने एक से बढ़कर एक भक्ति गीत की प्रस्तुति दी। इसी तरह कार्यक्रम की दूसरी कड़ी में रायगढ़ की नीत्या खत्री की कथक प्रस्तुति ने भाव-भंगिमाओं और मुद्राओं ने पूरे कार्यक्रम में समा बांध दिया। नित्या खत्री रायगढ़ घराने के भूपेन्द्र बरेठ कत्थक नृत्य से शिक्षा प्राप्त कर रही है।
कथक शब्द का उदभव कथा शब्द से हुआ है जिसका शाब्दिक अर्थ है कथा कहना। यह नृत्य मुख्य रूप से उत्तरी भारत में किया जाता है। कथक नृत्य शैली में विशेष रूप से रायगढ़ घराना, लखनऊ घराना, जयपुर घराना प्रसिद्ध है। कथक नृत्य की प्रस्तुति से पहले उन्होंने कहा कि मैं आज जो भी ही अपने गुरू की वजह से। उन्होंने इस मंच पर प्रस्तुति प्रदान के लिए जिला प्रशासन को धन्यवाद ज्ञापित की।चक्रधर समारोह की चौथी शाम अकॉर्डियन की सुरीली धुनों से सजी। रायपुर से पहुंचे तपसीर मोहम्मद और उनकी टीम ने कई प्रसिद्ध गीतों की इंस्ट्रुमेंटल प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम की खासियत रही की इसमें 8 वर्ष की नन्हे कलाकार से लेकर 77 साल के लीजेंड कलाकार तपसीर मोहम्मद ने साथ मिलकर ऐसा कार्यक्रम पेश किया कि श्रोताओं की वाहवाही उन्हें पूरे कार्यक्रम के दौरान मिलती रही। जीना यहां मरना यहां इसके सिवा जाना कहां, आज कल तेरे-मेरे प्यार के चर्चे, अजी ऐसा मौका फिर कहां मिलेगा.. एन इवनिंग इन पेरिस, गुलाबी आंखे जो तेरी देखीं जैसे गीतों पर शानदार प्रस्तुति दी। चक्रधर समारोह के मंच पर एक अनोखा नजारा दिखा। जब अकॉर्डियन वादन की एंकरिंग करने मंच पे अफ्रीकी कलाकार पहुंचे।
उन्होंने कहा छत्तीसगढिय़ा सबले बढिय़ा। जिसे देखकर दर्शक भी कौतूहल से भर उठे। साउथ अफ्रीका से पहुंचे जी रेक्स और क्रोनी हॉनिड दर्शकों को कार्यक्रम का ब्यौरा देते रहे। जिसका सुनने वालों ने खूब लुत्फ उठाया। अपने बीच विदेशी कलाकारों को पाकर श्रोताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। दिल्ली से आये शिव प्रसाद राव शास्त्रीय गायन पर अपनी प्रस्तुति दिए। शास्त्रीय संगीत भावों और रागों का खूबसूरत संगम है। शिव प्रसाद आकाशवाणी दूरदर्शन सहित विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुतियां दे चुके हैं। शास्त्रीय गायन की शुरुआत वैदिक काल से हुई। शास्त्रीय संगीत की दो पद्धतियां हैं हिंदुस्तानी संगीत और कर्नाटक संगीत।
शिव प्रसाद की शिक्षा दीक्षा कटक में हुई हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन में विशेष रुचि के कारण ग्वालियर शास्त्रीय घराने से उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया। हिंदुस्तानी संगीत में ध्वनि के प्रधानता होती है, जबकि कर्नाटक संगीत में भाव की प्रधानता होती है। रायगढ़ कत्थक घराने की प्रख्यात कत्थक नृत्यांगना बासंती वैष्णव और ज्योति बोहिदार मां-बेटी की जोड़ी ने कत्थक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रायगढ़ कत्थक नृत्य को मती बासंती वैष्णव और ज्योति बोहिदार ने विशेष पहचान दी है। चक्रधर समारोह के अवसर पर मां-बेटी की जोड़ी द्वारा मां गंगा के धरती पर अवतरण का जीवंत प्रदर्शन ठा.गजमड़ी सिंह जी की रचना के माध्यम से कार्यक्रम की मनमोहक प्रस्तुति दी।
रायगढ़ घराने के कत्थक को बासंती वैष्णव द्वारा चीन, फ्रांस, जापान, दुबई जैसे कई देशों में प्रस्तुत कर गौरवान्वित किया गया है। इसी प्रकार मती ज्योति बोहिदार द्वारा भी स्पेन, नेपाल, दुबई जैसे कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रायगढ़ घराने के मनमोहक कत्थक नृत्य की प्रस्तुति दी जा चुकी है। उनके द्वारा चक्रधर समारोह में विशुद्ध रूप से रायगढ़ घराने के कत्थक शैली में अंग एवं भाव संचालन के माध्यम से मनमोहक प्रस्तुति दी गई। मती ज्योति बोहिदार रायगढ़ घराने की तीसरी पीढ़ी की कत्थक नृत्यांगना है और वे वर्तमान में पं.राजेंद्र के पास शिक्षा प्राप्त कर रही है। भारतीय संगीत और नृत्य शास्त्र इन जैसे कलाकारों से ही संपन्न होता है। प्रख्यात कत्थक नृत्यांगना बासंती वैष्णव और ज्योति बोहिदार की टीम में बेहतरीन तबला वादक, बांसुरी, मुजिकल आदि द्वारामनमोहक प्रस्तुति दी गई।
रायगढ़ के चक्रधर समारोह का मंच पर अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त और सर्वोच्च सांगीतिक सम्मान के विजेता बांसुरी वादक राकेश चौरसिया की प्रस्तुति हुई। उनकी मधुर मुरली से निकले अद्भुत और अलौकिक सुरों ने पूरे समारोह में एक रूहानी मिठास घोल दी। राग हेमावती से शुरू हुआ धुनों का सुरीला सफर तबले पर रूपक भट्टाचार्य की संगत के साथ श्रोताओं को बांसुरी के आरोह-अवरोह की मधुर सांगीतिक यात्रा पर ले कर गया। रघुपति राघव राजा राम, वैष्णव जन तो तेने कहिए जैसे भजनों को उन्होंने अपनी बांसुरी के सुरों से सजा के प्रस्तुत किया। राकेश चौरसिया पद्मविभूषण हरिप्रसाद चौर

