सामूहिक मौत कांड में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, दो संदिग्ध हिरासत में

सामूहिक मौत कांड में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, दो संदिग्ध हिरासत में

रायपुर। टिकरापारा के संजय नगर में बैटरी मैकेनिक सैयद शाहिद उर्फ सज्जू द्वारा पत्नी और तीन बच्चों की कथित हत्या के बाद आत्महत्या के मामले की जांच अब केवल आर्थिक तंगी तक सीमित नहीं रह गई है।

विशेष जांच दल (एसआइटी) और पुलिस अब इस मामले में सूदखोरी, सट्टेबाजी और संदिग्ध लेन-देन के एंगल पर भी पड़ताल कर रही है। घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज से मिले अहम सुरागों के आधार पर पुलिस ने दो संदिग्ध सूदखोरों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। हालांकि पुलिस ने अभी आधिकारिक तौर पर किसी की संलिप्तता की पुष्टि नहीं की है।

शाहिद ने किन लोगों से लिया था कर्ज

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, हिरासत में लिए गए दोनों व्यक्तियों में एक टिकरापारा और दूसरा गोलबाजार क्षेत्र का रहने वाला है। सीसीटीवी फुटेज में दोनों को घटना से पहले और घटना के एक दिन पूर्व शाहिद के घर के आसपास आते-जाते देखा गया है।

पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इनकी शाहिद से कितनी रकम का लेन-देन था और क्या उस पर ब्याज का दबाव बनाया जा रहा था। साथ ही उन लोगों की सूची भी तैयार की जा रही है, जिनसे शाहिद ने उधार लिया था। इनमें कुछ लोगों के सट्टा कारोबार से जुड़े होने की भी चर्चा सामने आई है, जिसकी अलग से जांच की जा रही है।

घटना से पहले कई लोगों से मिला, लेकिन नहीं जताई परेशानी

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि घटना वाले दिन शाहिद कई परिचितों और दोस्तों से मिला था। हालांकि उसने किसी से भी अपनी आर्थिक परेशानी, मानसिक तनाव या किसी धमकी का जिक्र नहीं किया। परिचितों का कहना है कि वह सामान्य बातचीत कर रहा था, लेकिन भीतर से काफी परेशान दिखाई दे रहा था।

दोस्त की मौत के बाद और बढ़ गई थी मायूसी

जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि घटना से एक दिन पहले शाहिद के करीबी दोस्त और गोलबाजार स्थित आजाद सैलून के संचालक कल्लू की हादसे में मौत हो गई थी।
गुरुवार को शाहिद अंतिम संस्कार में शामिल होने निकला, लेकिन वहां पहुंचने से पहले अंतिम संस्कार हो चुका था। वहां मौजूद लोगों ने पुलिस को बताया कि उस दिन शाहिद बेहद उदास था और लोगों के सवालों का जवाब केवल ””हां”” या ””न”” में दे रहा था। पुलिस उसके इस व्यवहार को भी जांच का हिस्सा मान रही है।

बेटे की कमाई से चल रहा था घर, नौकरी भी छूट गई थी:

जांच में यह भी सामने आया है कि कभी बैटरी कंपनी में मैनेजर रहे शाहिद की आर्थिक स्थिति पिछले कुछ वर्षों में लगातार खराब होती चली गई। वह इन दिनों मौदहापारा की एक बैटरी वर्कशाप में काम तो करता था, लेकिन आमदनी बेहद कम थी। परिवार का अधिकांश खर्च उसके निजी कंपनी में कार्यरत बेटे की आय से चल रहा था।
परिचित बताते हैं कि शाहिद स्वाभिमानी था और भाइयों से अलग होने के बाद उसने पुश्तैनी संपत्ति में हिस्सा मांगना भी छोड़ दिया था। हालांकि, परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि उसकी 90 वर्ष से अधिक उम्र की मां अपने नाम पर बची जमीन शाहिद को देना चाहती थीं। इस संबंध में शाहिद ने कुछ परिचितों से भी चर्चा की थी। पुलिस इस जानकारी की भी पुष्टि कर रही है।

दो खाली शीशियां बरामद

पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई गई है कि शाहिद ने परिवार के सदस्यों को बिना जानकारी दिए रसगुल्ले में कीटनाशक मिलाकर खिलाया। सबसे अंत में घर लौटे बेटे को भी कथित रूप से वही मिठाई खिलाई गई। इसके बाद सभी की मौत होने की पुष्टि करने के बाद शाहिद ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

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